
दर तक आकर तेरे,
दीदार को तरस जाते है|
किस्मत को कोसते है कभी,
कभी अपनों पर बरस जाते है||
हालात का है दोष या ,
नसीब का फरमान है |||
मंजिल तक आते आते
राहों से भटक जाते है ||||
दर तक आ कर तेरे ,
तेरे दीदार को तरस जाते है |
...............................लक्की
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