Meri baat

जिन्दगी में कुछ शब्द कही खो गए,
चलिए साथ मिलकर उन्हें खोजे,
कुछ कहे कुछ सुने हो सकता है वो शब्द लौट आये और तब शायद पूरी हो
मेरी बात

रविवार, 1 दिसंबर 2013





"क्या वाकइ यहॅा ज़िदंगी भागती है।"
A Poem Written and perform by Lakulish sharma




Posted by Lakulish at 11:22 am कोई टिप्पणी नहीं:
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