खुद की नजरो का ये धोका अब हमें मंजूर है |
अपने हालाथो का सौदा अब हमें मंजूर है ||
बेअदब और बेहयाई अब तलक हराम थी |
उनकी फितरतो का यूँ कसना अब हमें मंजूर है||
गर मंजिले मिलती है जो कही खैरात मै|
तो फिर खैरातो की रहमत अब हमें मंजूर है ||
उठ कर गिरना गिर कर उठना आदतों में था मगर|
बैसाखियों से हुई मोहब्बत अब हमें मंजूर है ||
मै क्यों मुख्तल ज़माने को बदलने की जिद करू |
ये बेइज्जती ये बेगुमानी अब हमें मंजूर है ||
...............................लक्की (भाई जान की मदद से)
*बेअदब = आशिष्ट ,असभ्य ,*बेहयाई =बेशर्म ,* फितरतो =स्वाभाव ,खैरात =भीख ,