
सूखे फूलो की महक अब बड़ गई है ,
तेरी तस्वीर से मोहब्बत बड़ गई है |
ताकीर हिमाकत की रुपहले परदे में
आई थी जों उल्फत वो बड़ गई है |
जमीनों जद्द रहे हम जहाँ गुलशनो के मौसम में
उन राहो की शख्सियत बड़ गई है |
जिस्म- जहान के फेर में, मै उलझा ही नहीं था
तेरे जाने से पर ये तबियत बदल गई है |
हर चेहरे की संजीदगी अब मजाक लगती है मुझे
मासूमियत की भी तो सूरत ही मर गई है |
...............................लक्की
nyc yaar..
जवाब देंहटाएंkamal ki lekhni he teri ....dil jeet lia
जवाब देंहटाएंyar kamal kar dia....DIVY
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