शनिवार, 27 नवंबर 2010

" खो गया है कुछ "


वो बनते बिगड़ते रिश्तो का
मौसम कहा गया
वो रुठते - मानते जज्बों का
आलम कहा गया ||1

बेखुदी में बनाई थी
जों तस्वीर आग की
दामन जला था जिससे
वो चिलमन कहा गया ||2

सरफ़रोश थे हम
जब थे ज़वा- ज़वा
बचपने की हरकतों में
जवानी का जोबन कहा गया || 3

बनाई थी बारिश में
जों कश्ती साथ की
वो कश्ती कहा गयी
वो सावन कहा गया ||

मेरी कलम से ......लक्की